गाँव का इतिहास

सन 1964 मे चौधरी चाँद राम ने यह ज़मीन गाँव बसने के लिए अलॉट करवाई| 1972 मे इंद्रा चक्रवर्ती जो उस समय गवर्नर पद पर थी| उन्होने यहा प्लॉट कटवाकर 10 -10 ह्जार रुपये मकान बनाने के लिए सरकार से दिलवाए| यहा की ज़मीन को आस पास के हरिजन परिवरो को बसाने के लिए जंगल कटवाकर तैयार करवाया गया त था पर्ची भरने के आधार पर ज़मीन अलॉट कराई गयी| उस समय प्रत्येक पर्ची की कीमत 27 रुपये रखी गयी| इस गाँव का नाम आज़ाद नगर इसलिए पड़ा क्योंकि सभी लोग हरिजन परिवार है|इस गाँव मे 40% लोग खेती करते है बाकी मज़दूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते है|

 

 

 

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